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March 5, 2024
देश

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित प्रमुख महिलाओं की कहानियां

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कठिन परिस्थितियों में साहसिक और उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया। इन्हीं में से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित प्रमुख महिलाओं की कहानियां कुछ इस प्रकार है। 

महिला दिवस
शांता बालू पंवार

86 वर्षीय शांता ताई की कला सोशल मीडिया पर काफी चर्चित है। शांता ताई जब लाठी चलाती हैं, तो देखने वाले देखते ही रह जाते हैं। वॉरियर आजी के नाम से मशहूर शांता ताई कई सालों से अपनी कला का प्रदर्शन महाराष्ट्र की सड़कों पर करती आ रही हैं, लेकिन इतना ज्यादा टैलेंट होने के बाद भी वो दुनिया की नजरों में छिपी रहीं। लॉकडाउन के दौरान उनकी एक वायरल वीडियो से लोगों ने उनकी कला को पहचाना। अब वह एक मार्शल आर्ट टीचर हैं।

कैप्टन तानिया शेरगिल और कैप्टन भावना कस्तूरी

हैदराबाद की रहने वाली लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी और होशियारपुर पंजाब की रहने वाली कैप्टन तानिया शेरगिल को सम्मानित किया गया। लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी देश की पहली महिला हैं, जिन्होंने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में पुरुष सैन्यदल की टुकड़ी का नेतृत्व किया। वहीं, कैप्टन तानिया शेरगिल गणतंत्र दिवस परेड की पहली महिला परेड एडजस्टेंट बनी।

भारतीय एयरफोर्स की पांच महिला अधिकारी भी सम्मानित -फ्लाइंग आफिसर अंजली

फ्लाइंग ऑफिसर अंजली 2019 में भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शामिल हुईं। एक्स सर्विसमैन पिता की बेटी अंजली खेल के मैदान में भी काफी आगे रही हैं और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वुशु में रजत पदक जीता है और 300 घंटों से ज्यादा का उड़ान का अनुभव रखने वाली फ्लाइंग आफिसर अंजली ने 18 फरवरी 2021 को सुखोई 30 एमकेआई की पहली महिला कैप्टन पायलट बनकर कीर्तिमान रचा है।

महिला
स्क्वाड्रन लीडर शिखा पांडेय

स्क्वाड्रन नीडर शिखा पांडेय भारत के लिए क्रिकेट खेलने वाली पहली और एकमात्र भारतीय वायु सेना अधिकारी हैं। देश के लिए क्रिकेट खेलने का सपना रखने वाली शिखा पांडेय ने क्रिकेट की ट्रेनिंग के साथ-साथ पढ़ाई भी जारी रखी और भारतीय वायु सेना में शामिल हुई। आज वह एक सफल क्रिकेटर हैं और वल्र्ड कप सहित कई महत्वपूर्ण टूनामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। शिखा आज क्रिकेट और भारतीय वायु सेना में रहकर देश सेवा कर रही हैं।

इसरो की महिला वैज्ञानिक भी हुई सम्मानित

22 जुलाई 2019 का दिन एक यादगार दिनों में से एक है, जब देश में करोड़ों लोग टीवी स्क्रीम पर आंखें लगाए चंद्रयान-2 को रवाना होते देख रहे थे। इस इतिहास को रचने वालों में ऐसी महिलाएं शामिल थी, जिन्होने दिन और रात नहीं देखा। वह सिर्फ एक सपना लेकर काम करती गईं और देश को विश्व की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इन महिला वैज्ञानिकों में शामिल वैज्ञानिक एवं इंजीनियर कल्पना अरविंद, वैज्ञानिक एवं इंजीनियर रितु करिदल, वैज्ञानिक एवं इंजीनियर जी. पदमा पदमानाभन, वैज्ञानिक एवं इंजीनियर केपी लिली, वैज्ञानिक एवं इंजीनियर प्रियंका को सम्मानित किया गया।

CRPF में इंस्पेक्टर सीमा नाग

देश में पहले लोग बुलेट राजा के बारे में जानते थे, लेकिन 2020 की गणतंत्र दिवस परेड में देशवासियों को महिलाओं ने बता दिया कि वो भी किसी से कम नहीं हैं। दिल्ली के राजपथ की सड़क पर चलती रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक पर सवार 65 जांबाज डेयरडेविल महिनलाओं को देखते ही सब अपनी कुर्सियों से खड़े होकर इन्हें सलाम करने लगे थे। इस जांबाज टुकड़ी का नेतृत्व सीआरपीएफ की इंस्पेक्टर सीमा नाग ने किया था। इन्हें भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

लक्ष्मी नरायण त्रिपाठी

ट्रांसजेंडर्स के लिए अपनी आवाज बुलंद करने वाली किन्नर अखाडा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी आज किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं। किन्नर समाज को समानता का अधिकार दिलाना, उनका मकसद है। इसके लिए वे 1999 से लड़ाई लड़ रही हैं। महाराष्ट्र में जन्मी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बचपन में डांस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। ट्रांसजेंडर्स कम्युनिटी के लिए सराहनीय कार्यों के लिए 2016 में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को किन्नर अखाड़े की पहली महामंडलेश्वर बनाया गया। साथ ही, वह यूनाइटेड नेशंस सिविल सोसायटी टास्क फोर्स की सदस्य रह चुकी हैं। लक्ष्मी पहली किन्नर हैं, जो संयुक्त राष्ट्र में एशिया प्रशांत क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। अपने समुदाय और भारत का प्रतिनिधित्व टोरंटो में विश्व एड्स सम्मेलन जैसे मंचों पर करने वाली लक्ष्मी त्रिपाठी ट्रांसजेंडर्स लिए ‘अस्तित्व’ नाम का संगठन चलाती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
ASI सीमा ढाका

दिल्ली पुलिस में तैनात महिला हेड कांस्टेबल सीमा ढाका के काम की देशभर में चर्चा है। सीमा ने अपने बहादुरी के दम पर 76 बच्चों को तलाश करने में कामयाबी हासिल की है। सीमा ने इन बच्चों को दिल्ली से ही नहीं, बल्कि बिहार, बंगाल जैसे दूर दराज के राज्यों से खोज निकाला। उनमें से 56 बच्चों की उम्र 14 साल में भी कम थी। उनकी कार्य निष्ठा और ईमानदारी के लिए उन्हें दिल्ली पुलिस ने एक खास प्रमोशन इंसेंटिव स्कीम के तहत, आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया। इस स्कीम के तहत सीमा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने वाली दिल्ली पुलिस की पहली कर्मचारी बन गई हैं।

ऑटो चालक प्रदीप कुमार

अच्छे नागरिक देश को समृद्ध और खुशहाल बनाने में अपनी भूमिका निभाते हैं, इस बात को साबित किया ऑटो चालक प्रदीप कुमार ने। 15 वर्षीय मासूम को एक ऑटो चालक ने झांसा देकर सूनसान स्थान पर ले गया और उसके साथ बलात्कार किया। मौका पाकर वह बच्ची वहां से भाग निकली। सड़क पर मासूम बच्ची को भागते हुए देख ऑटो ड्राइवर प्रदीप ने उसकी सहायता की।

बिलकिस को भी किया सम्मानित

साहस और हिम्मत की कोई उम्र नहीं होती है। 82 वर्षीय बिलकिस इसका जीता-जागता एक उदाहरण हैं। दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाली बिलकिस ने 2020 में एक 17 वर्षीय लड़की के बाल विवाह की सूचना दिल्ली महिला आयोग को दी, जिसके चलते उस बाल विवाह को आयोग ने जाकर रूकवा दिया।

कुशा कपिला
कुशा कपिला
कुशा कपिला

मैं मीटी हूं, मैं बहुत पतली हूं, लोग क्या कहेंगे, ये सब सवालों ने हम सबको जीवन के किसी न किसी मोड पर जरूर परेशान किया है। लेकिन कुशा कपिला कहती हैं कि लोग जो बालें, उन्हें बोलते रहने दो। इंस्टाग्राम के जरिए आज कुशा कपिला का कंटेंट करोड़ों लोग देखते हैं और अपने सरल कॉमिक स्टाइल में कपिला जो संदेश लोगों के दिलों तक पहुंचाती हैं, वो शायद किसी भाषण या किताब के जरिए भी देना मुश्किल है।

डॉली सिंह
डॉली सिंह
डॉली सिंह

उत्तराखंड के एक छोटे से शहर में जन्मी डॉली सिंह आज सोशलन मीडिया जगत की एक बड़ी हस्ती बन चुकी हैं। बचपन से ही कुछ बड़ा करने का सपना लेकर चलीं डॉली ने अपनी मेहनत से आज अपने आपको इतने बड़े मुकाम पर पहुंचाया है। आज इनकी वीडियो देश के कोने-कोने में देखी जाती है। 2015 में आई-दिवा में बतौर प्रोड्यूसर और राइटर अपना करियर शुरू करने वाली डॉली ने कभी पीछे मुड़ कर नही देखा। इनकी वीडियो न सिर्फ आपको हंसाती है, बल्कि बड़ी सहजता से आपको सही-गलत का फर्क भी समझाती हैं।

शहीद गुरतेज सिंह

पंजाब के मनसा जिले के रहने वाले 23 वर्षीय शहीद सिपाही गुरतेज सिंह पराक्रम और शौर्य की ऐसी मिसाल हैं, जिन्हें देश सदियों तक याद रखेगा। पिछले वर्ष चीन के साथ गमवान घाटी में हुई टकरार ने जब हिंसक रूख लिया, तब सिपाही गुरतेज पर चार चीनी सैनिकों में हमला बोला। गुरतेज डरे नहीं, बल्कि उनकी तरफ बढ़े। गुरतेज ने दो दुश्मनों को वही ढेर कर दिया। गुरतेज चारों को पहाड़ी पर खींच कर ले गए और यहां से उन्हें नीचे गिरा दिया, लेकिन दु्र्भाग्यवश वो भी अपना नियंत्रण खो बैठे और फिसल गए। घायल होने के बाद भी गुरतेज 11 चीनी जवानों को ढेर कर चुके थे और शहादत से पहले गुरतेज में अपनी कृपाण से 12वें चीनी सैनिक को भी ढेर किया।

सरदार मोहिंदर सिंह

गोकुलापुरी के सरकार मोहिंदर सिंह ने पिछले साल हुए दंगों में हिम्मत और मानवता दिखाते हुए 40 में भी अधिक लोगों की जान बचाई। मोहिंदर सिंह ने दंगों में फंसे लोगों को पगड़ी पहनाकर सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होने बेटे के साथ मिलकर अपनी एक बाइक और स्कूटी पर लोगों को बिठाया और सबको सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। मोहिंदर सिंह महज 13 वर्ष के थे, जब उन्होंने 1984 का दंगा अपनी लाखों में देखा। मोहिंदर सिंह ने मन में ठाना था कि बस किसी तरह लोगों की जान बचाई जा सके।

यह भी पढ़ें: महिला दिवस: साहस और स्नेह का मिला जुला स्वरूप है औरत

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