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May 25, 2024
एजुकेशन/करियर

आईआईटी कानपुर ने National Centre for geodesy का किया शुभारंभ

कानपुर : आईआईटी कानपुर में जियोडेसी(Geodesy) की नई ब्रांच नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी (एनसीजी) का शुभारंभ कर दिया गया है। इस सेंटर को सभी एडवांस सुविधाओं से लैस किया गया है। यह ऐसी ब्रांच है, जिसमें पृथ्वी के किसी भी हिस्से के सही मापन में मदद मिलती है।

इससे अब आईआईटी जमीन के अंदर जल स्रोत, पृथ्वी का आकार, भू-जल की स्थिति, भूकंप, जमीन के अंदर प्लेट्स की हलचल समेत अन्य खगोलीय गतिविधियों की जानकारी और उन पर शोध कर सकेगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी समय से पहले मिल सकेंगी।

geodesy
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आईआईटी कानपुर में नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी(geodesy) का उद्घाटन निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अधिकारियों संग किया। उन्होंने विभाग से संबंधित वैज्ञानिकों संग बैठक कर शोध व अन्य कार्यों को लेकर समीक्षा की। यह सेंटर नई टेक्नोलॉजी में एरिया ऑफ मैपिंग, रिमोट सेंसिंग के बारे में जानकारी देगा।

यहां कई तरह के उपकरण और टॉवर लगाए गए हैं, जिनसे कई किलोमीटर दूर धरती के अंदर की गतिविधियों का पता चल सकेगा। केंद्र का लोकार्पण जुलाई 2019 में हुआ था। कोरोना संक्रमण की वजह से कुछ कार्य रुक गया था। प्रो. ओंकार दीक्षित की देखरेख में प्रो. बी नागराजन व प्रो. बालाजी देवराजू सेंटर में कार्य करेंगे। यह शिक्षा और अनुसंधान गतिविधियों को खोजने वाला देश का पहला केंद्र होगा। केंद्र में जियो स्टेशनरी माडलिंग, हाइट रेफरेंस सिस्टम, पोलर मोशन आदि पर काम होगा।

यह ब्रांच दूरी, ऊंचाई, गुरुत्व का पता लगा लेगी। सेंटर में इस कोर्स के तहत भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन और मौसम के खतरे, जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य, जल संसाधन, सूखा निगरानी के बारे में जानकारी दी जाएगी।

प्राकृतिक आपदाओं की देगा जानकारी

इस geodesy सेंटर के बनने के बाद आईआईटी अब जमीन के अंदर जल स्रोत, पृथ्वी का आकार, भू-जल की स्थिति, भूकंप, जमीन के अंदर प्लेट्स की हलचल समेत अन्य खगोलीय गतिविधियों की जानकारी और उन पर शोध कर सकेगा। यह सेंटर नई टेक्नोलॉजी में एरिया ऑफ मैपिंग, रिमोट सेंसिंग के बारे में जानकारी देगा। यहां कई तरह के उपकरण और टावर लगाए गए हैं, जिनसे कई किलोमीटर दूर धरती की गतिविधियों का पता चल सकेगा। यहां लगे यंत्रों से भूकंप, ज्वालामुखी, भूस्खलन और मौसम के खतरे, जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य, जल संसाधन, सूखा निगरानी का पता लगाया जा सकेगा।

दो हफ्ते के कोर्स का हो चुका है आयोजन

नेशनल सेंटर फॉर जियोडेसी और आईआईटी कानपुर ने हाल ही में सीनियर लेवल सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) के अफसरों के लिए दो हफ्ते के कोर्स का आयोजन किया था। बताया गया कि जियोडेसी ऐसी ब्रांच है जिसमें पृथ्वी के किसी भी हिस्से के सही मापन में मदद मिलती है।

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