विचार

सशक्त, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प साकार करेंगेः मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशवासियों को सम्बोधित करते हुए

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन का सार

नई दिल्ली,  15 अगस्त। 

देश के 74वें स्वतंत्रता दिवस समारोह पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सशक्त, सुरक्षित, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर भारत का एक भव्य चित्र देशवासियों के सामने प्रस्तुत किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने 130 करोड़ देशवासियों के विश्वास और ऊंचे मनोबल का अभिमान करते हुए कहा कि कोरोना सहित सभी तरह की चुनौतियों और संकटों के बीच वे आत्मनिर्भरता का नया सूरज उगता हुआ देख रहे हैं। 

प्रधानमंत्री का 86 मिनट लंबे संबोधन

अपने 86 मिनट लंबे संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए नई शिक्षा नीति, स्वास्थ्य के क्षेत्र में नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एग्री एन्फ्रास्ट्रक्चर फंड, 6 लाख गांवों के विकास के लिए 1 हजार दिन में ही आप्टिकल फाइबर का संजाल बिछाने, शहरी मजदूरों के लिए सस्ते घर, मध्यम वर्ग के लिए इनोवेशन के साथ छलांग लगाने की योजनाएं, महिलाओं को अवसर के साथ ही अयोध्या में मंदिर निर्माण से देश में एकता और भाईचारे की एक विस्तृत तस्वीर उकेरते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र गुंजाते हुए देशवासियों के मन में स्वावलंबी, स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प जगाने का काम किया। 

प्रधानमंत्री ने एक परिवार का उदाहरण सामने रखते हुए कहा कि परिवार का बच्चा जब 20-21 साल का होने लगता है, उससे पहले ही हम सब यह सोचने लगते हैं कि वह अपने पैरों पर खड़ा हो जाए, आत्मनिर्भर हो जाए। आज जबकि देश की स्वतंत्रता को 75 साल होने जा रहे हैं तब क्या देशवासी यह संकल्प नहीं ले सकते कि हमारा देश आत्मनिर्भर हो। उन्होंने कहा कि हम खुद को इसके लिए तैयार करें। ऐसा पिछले एक साल में हमने अनेक अवसरों पर देखा है। कोरोना, बाढ़, टिड्डियों के आक्रमण के साथ ही सीमा पर चुनौतियों के बीच भी देशवासियों को आत्मविश्वास यह  बताता है कि भारत जो ठान लेता है, वह करके दिखाता है।  

भारत जो ठान लेता है, करके दिखाता है

लालकिले से लगातार सातवीं बार संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आज हर उस विषय पर खुलकर अपनी बात रखी, जिसका लोगों को इंतजार था।  इनमें सीमा पर चीन की विस्तारवादी नीति के चलते उपजे संघर्षपूर्ण गतिरोध पर सबकी निगाहें थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हमारी सीमाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं और हमारी सेना किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देना जानती है। यह उसने लद्दाख में कर दिखाया और पूरी दुनिया ने भारत के शौर्य और पराक्रम का लोहा माना। 

प्रधानमंत्री ने चीन और पाकिस्तान का नाम लिये बिना इन देशों से जुड़ती सीमाओं का नाम लेते हुए कहा कि एलओसी (नियंत्रण रेखा) से लेकर एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) तक देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख दिखाई, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया। लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद हुए जवानों को लालकिले की ऊंचाई से प्रणाम निवेदित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया ने देख लिया कि भारत जो ठान लेता है, वह करके दिखाता है। 

नादान पड़ोसियों को चेतावनी

इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि पड़ोसी सिर्फ वही देश नहीं हैं, जिनसे हमारी भौगोलिक सीमाएं जुड़ती हैं बल्कि हमारे पड़ोसी वे भी हैं, जिनसे हमारे दिल जुड़ते हैं। “एक्सटेंडेड नेवरहुड” शब्द का प्रयोग करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि यदि पड़ोसी देश अपनी विस्तारवाद और आतंकवाद परस्त नीति से बाज नहीं आते तो उनकी अधिक चिंता वे नहीं करेंगे बल्कि वे वसुधैव कुटुम्बकम को सूत्र ध्यान में रखकर विश्व समुदाय की साथ निकटता बढ़ा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अस्थायी सदस्य के प्रस्ताव पर दुनिया भर के 192 देशों में से 184 देशों ने समर्थन दिया। यह भारत के प्रति उनके बढ़ते विश्वास को प्रकट करता है।

पूर्व के देशों से हमारे ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध

उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में हमारे अनेक मित्र देश हैं, जिन्होंने कोरोना काल में भारत और भारतीयों की बहुत मदद की। पूर्व के देशों से हमारे ऐतिहासिक सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम इस पूरे क्षेत्र में शांति चाहते हैं। इसलिए इस पूरे उप महाद्वीप की राजसत्ताओं, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों का आह्वान करते हैं कि हम अपने प्राचीन व ऐतिहासिक-सांस्कृतिक रिश्तों को और गहराई दें। वस्तुतः इस क्षेत्र में स्थापित हुई स्थायी शांति पूरे विश्व के लिए आवश्यक है। 

इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हम जितने प्रयास शांति और सौहार्द्र के लिए करते हैं, उतने ही देश को सुरक्षित करने के लिए शक्ति का संधान करने के लिए भी करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि हम अपनी रक्षा जरूरतों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इसके लिए 101 रक्षा उपकरणों के आयात को प्रतिबंधित किया गया है, जिसमें मिसाइल तक शामिल हैं। सेनाओं को सन्नद्ध करने के साथ ही तटीय क्षेत्रों के एक लाख युवाओं, जिनमें से एक तिहाई बेटियां होंगी, को एनसीसी से जोड़कर उनका प्रशिक्षण सेना द्वारा कराने की घोषणा कर उन्होंने साफ कर दिया कि जल-थल-नभ तक भारत की सुरक्षा उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।

आकांक्षाओं की पूर्ति की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने याद दिलाया कि लालकिले से अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संबोधन में पिछले साल उन्होंने कहा था कि पिछले 5 साल आवश्कताओं की पूर्ति के लिए थे, अगले पांच साल आकांक्षाओं की पूर्ति के होंगे। इसके साथ ही उन्होंने वे आकांक्षाएं भी गिनाईं, जो लोगों के मन में थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक साल में ही देश ने बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों के पड़ाव को पार कर लिया है। गांधी-150 के इस वर्ष में देश के गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त किया है।

आस्था की वजह से प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने का कानून, असम और त्रिपुरा में स्थायी शांति के लिए ऐतिहासिक समझौता, फौज को सशक्त बनाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति, करतारपुर साहिब कॉरिडोर का न्यूनतम समय में निर्माण के साथ ही एससी, एसटी, ओबीसी के आरक्षण के अधिकारों को बढ़ाने का फैसला लेकर सरकार ने जनाकांक्षाओं की पूर्ति का काम किया। देश ने इन सब में इतिहास बनते देखा। 

अयोध्या पर देशवासियों का आचरण भविष्य के लिए प्रेरणादायक

ऐसा ही एक इतिहास अयोध्या से भी जुड़ा है। सदियों से लंबित एक आकांक्षा, यानी राम मंदिर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज से 10 दिन पहले अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। राम जन्मभूमि के सदियों पुराने विषय का शांतिपूर्ण समाधान हो चुका है। इस दौरान देश के लोगों ने जिस संयम और समझदारी के साथ आचरण-व्यवहार प्रकट किया, वह अभूतपूर्व है। भविष्य के लिए हमारी प्रेरणा का कारक है। शांति, एकता और सद्वभावना- यही तो आत्मनिर्भर भारत की ताकत बनने वाली है। यही मेलजोल, यही सद्भभाव भारत के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। इसी सद्भभाव के साथ हमें आगे बढ़ना है। 

कश्मीर में प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले से संबोधन में एक साल पहले जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त किए जाने को एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि 370 को हटाए जाने के बाद दलितों-वंचितों-शरणार्थियों और महिलाओं को वे सभी अधिकार मिल गए, जो इसके चलते नहीं दिये जा रहे थे।  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पिछले दिनों स्थानीय निकायों के चुनाव हुए और पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि लोकतंत्र के आधार होते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जम्मू-कश्मीर में डि-लिमिटेशन की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही वहां चुनाव कराएं जाएंगे।

लद्दाख पेश करे नजीर

प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बनाकर हमने वहां के लोगों की वर्षों पुरानी आकांक्षा को पूरा किया है। अब उस विशेष क्षेत्र का तेजी से विकास हो सकेगा। पिछले एक साल में वहां केन्द्रीय विश्वविद्यालय से लेकर सौर ऊर्जा आदि के कई प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ने लद्दाखवासियों से अपेक्षा की कि जैसे सिक्किम एक ऑर्गेनिक स्टेट के रूप में विकसित हुआ है, उसी तरह लद्दाख की भौगोलिक और प्राकृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए तेज विकास के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान दें। हम लद्दाख को एक कार्बन न्यूट्रल स्टेट बनाकर सम्पूर्ण देश और विश्व के सामने एक मिसाल पेश कर सकते हैं।

वोकल फ़ॉर लोकल‘ को बनाए जीवन का मंत्र

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर शब्द का प्रयोग 40 बार से अधिक किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश के सामने चुनौतियां बड़ी हैं लेकिन देश में उन चुनौतियों को पार पाने के लिए करोड़ों समाधान भी मौजूद है। उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि अब लोगों को वोकल फॉर लोकल होने की जरूरत है। इसे अब जीवन मंत्र बना लेना चाहिए। हमें अपने देश में बनी चीजों का न केवल इस्तेमाल करना चाहिए बल्कि उसका गुणगान करना चाहिए।

कोरोना काल में भारत की बड़ी बड़ी कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स बनाए हैं। इससे पहले एन-95 मास्क, पीपीई किट्स, वेंटिलेटर सब विदेशों से मंगवाते थे, लेकिन अब इन सभी में भारत न सिर्फ अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है बल्कि दूसरे देशों को भी निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह भारत के प्रति विश्व समुदाय के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है कि देश में पिछले साल प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश (एफडीआई) में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। आज दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही है। हमें मेक इन इंडिया के साथ साथ अब मेक इन वर्ल्ड  के मंत्र के साथ भी आगे बढ़ना होगा। 

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के दिन नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इस मिशन के तहत जारी होने वाला हेल्थ आईडी कार्ड इस क्षेत्र में क्रांति लेकर आएगा । इस कार्ड से लोगों की न केवल स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को दूर होगी बल्कि तकनीकी का उपयोग करके लोगों के स्वास्थ्य संबंधी सारे रिकार्ड आसानी से उपलब्ध होंगे। अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर दवा लेने तक का काम इस कार्ड की मदद से किया जा सकेगा। इस कार्ड में मरीजों के टेस्ट, दवा, रिपोर्ट सभी का ब्योरा होगा। इसके आधार पर वे और डाक्टर मिलकर इलाज का सही फैसला कर पाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ने देश स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से विकास कर रहा है। करोना महामारी के इस संकट काल में देशवासियों ने दिखा दिया कि वे चुनौती को अवसर में बदलने का माद्दा रखते हैं। मार्च के महीने में जब यह महामारी शुरू हुई तो हमारे देश में इसकी जांच के लिए मात्र एक लैब थी। आज 1400 प्रयोगशालाएं देश भर में दिन रात काम कर रही हैं।

तब हम 300 टेस्ट प्रतिदिन कर पा रहे थे, आज 7 लाख से ज्यादा टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। एन 95 मास्क, पीपीई किट से लेकर वेंटिलेटर आदि इससे जुड़ी सभी जरूरतों के मामले में हम आत्मनिर्भर हो चुके हैं। देश में नए एम्स खोले गए हैं। पिछले पांच सालों में एमबीबीएस की 45 हजार से ज्यादा सीटों की बढोतरी की गई है। देश में 1.5 लाख वेलनेस सेंटर ने कोरोना से निपटने में बड़ी भूमिका अदा की है। 

कोरोना वैक्सीन के लिए तप कर रहे वैज्ञानिक

प्रधानमंत्री ने कोरोना वैक्सीन के बारे कहा कि हम एक-दो नहीं, तीन-तीन वैक्सीन पर तेजी से काम कर रहे हैं। हमारे डाक्टर और वैज्ञानिक किसी ऋषि की तरह प्रयोगशालाओं में तपस्या कर रहे हैं। दिन रात शोध कर रहे हैं और तीनों वैक्सीन पर अलग अलग चरण में काम चल रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि सब तरह के परीक्षण के बाद जल्द ही इस विषय में खुशखबरी सामने आएगी। वैक्सीन के ईजाद हो जाने के बाद उसका तेजी से उत्पादन कैसे हो और वह लोगों तक जल्द से जल्द कैसे पहुंचे, इसकी हमने पूरी तैयारी अभी से कर रखी है। 

जड़ से जोड़ेगी, आकाश तक पहुंचाएगी शिक्षा नीति

हाल ही में घोषित नई शिक्षा नीति को अपने संबोधन का हिस्सा बनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन दशक बाद देश को नई शिक्षा नीति मिली है। यह शिक्षा नीति हमें जड़ों से जोड़ेगी और साथ ही आकाश की ऊंचाईयों तक भी ले जाएगी। यह हमें ग्लोबल सिटीजन बनने का रास्ता दिखाएगी। इस शिक्षा नीति में इनोवेशन पर बल दिया गया है। कोरोना के इस कालखंड में हमने देखा कि गांव गांव तक बच्चे ऑनलाइन शिक्षा के महत्व को समझने लगे हैं। हम जब ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की बात कर रहे थे तो लोगों को उसका महत्व नहीं पता था लेकिन वह तैयारी थी कि पिछले दिनों में भीम एप का प्रयोग करते हुए लोगों ने 3 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन किया है।

नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर 110 लाख करोड़ से ज्यादा होंगे खर्च

उन्होंने कहा कि भारत को आधुनिकता की तरफ, तेज गति से ले जाने के लिए देश के सभी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को एक नई दिशा देने की जरूरत है। इस पर देश 110 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। इसके लिए 7000 प्रोजेक्ट की पहचान कर ली गई है। इससे देश को एक नई दिशा और गति मिलेगी। 

स्वावलंबी किसान समर्थ भारत

प्रधानमंत्री मोदी ने किसान को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानते हुए कहा कि खेती किसानी में आत्मनिर्भर होने के बाद अब हम किसानों की आय दोगुनी करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। एक दौर था जब हम पेट भरने के लिए गेहूं का आयात करते थे। हमारे देश के किसानों ने अपने परिश्रम से यह दिन ला दिया है कि हम अब दुनिया भर की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इस सबके बावजूद कृषि क्षेत्र में इतने बंधन थे कि किसान वेवश दिखते थे।

हमने किसानों को बंधन मुक्त कर दिया है। अब वे देश क्या दुनिया में जहां चाहें अपनी उपज बेच सकते हैं। कृषि के क्षेत्र में जितने रिफार्म्स हुए हैं, उतने किसी भी क्षेत्र में नहीं हुए हैं। एक लाख करोड़ रुपए का एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड निर्धारित कर खेती-किसानी से जुड़े अन्य क्रियाकलापों का विकास होने से किसानों की आय दोगुनी होगी। इसमें एफपीओ बड़ी भूमिका निभाएगा।

अवसर मिला तो महिलाओं ने देश का नाम रोशन किया है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में नारी शक्ति के योगदान को भी महत्व दिया। उन्होंने कहा कि भारत में महिला शक्ति को जब भी अवसर मिला, उन्होंने देश का नाम रोशन किया और देश को मजबूती दी है। आज भारत में महिलाएं अंडरग्राउंड कोयला खदानों में काम कर रही हैं तो लड़ाकू विमानों से आसमान की बुलंदियों को भी छू रही हैं। उन्होंने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा हो या फिर महिलाओं को गर्भावस्था में छह महीने का अवकाश देना हो, सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी रही है।

उन्होंने कहा कि 40 करोड़ जनधन खातों में से 22 करोड़ खाते महिलाओं के हैं। 25 करोड़ मुद्रा लोन लेने वालों में से 70 फीसदी महिलाएं हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं के नाम पर बड़ी संख्या में मकानों की रजिस्ट्रियां हो रही हैं। जन औषधि केन्द्र में एक रुपये में सैनिटरी पैड पहुंच रहा है। गरीब महिलाओं तक अब तक 5 करोड़ से ज्यादा सैनिटरी पैड पहुंचा है। इसके अलावा लड़कियों की शादी की सही उम्र क्या हो, इसे तय करने के लिए भी कमेटी का गठन किया गया है।

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