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February 24, 2024
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कृषि कानून के खिलाफ गांव-गांव ‘चक्का जाम’ की तैयारी में जुटे किसान

गाजियाबाद: कृषि कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन को और मजबूती देने के लिए किसान गांव-गांव जाकर 6 फरवरी को प्रस्तावित ‘चक्का जाम‘ को सफल बनाने की रणनीति में जुट गए हैं। हालांकि इस बीच ट्रैक्टरों के बार्डर पर पहुंचने का सिलसिला भी जारी रहा।

बुधवार को अमरोहा-बिजनौर से समाजवादी पार्टी के एमएलसी परवेज अली अपने समर्थकों के साथ किसान आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार से मांग की कि तीनो कृषि कानून को रद्द किया जाए, ताकि दो माह से भी अधिक समय से सड़कों पर पड़ा किसान अपने घर लौट सके।

यूपी गेट पर मौजूद भारती किसान यूनियन के गाजियाबाद जिलाध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चे की घोषणा को लेकर तैयारी की जा रही है।

कृषि कानून

तंबुओं के बीच से एंबुलेंस निकलवा रहे किसान 

दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बार्डर से दिल्ली में जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया है। ऐसे में किसानों के मंच वाले रास्ते में से जो एक लेन एम्बुलेंस के लिए खुली रखी गई थी, वह भी बंद हो गई। किसान दो दिन से एंबुलेंस को रास्ता देने की मांग कर रहे हैं। सुनवाई न होने पर किसानों ने अपने तंबुओं के बीच से एंबुलेंस के लिए रास्ता खोल दिया है।

दिल्ली की सीमा में बेरिकेडिंग होने के कारण एंबुलेंस को यूपी गेट फ्लाईओवर के नीचे से निकालकर कौशांबी के रास्ते आनंद विहार की ओर भेजा जा रहा है। कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन स्थल पर मौजूद किसानों का कहना था कि किसान अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है।

सरकार द्वारा रास्ते बंद किए जाने के बाद एंबुलेंस चालकों को काफी दिक्कत हो रही थी, जिसके चलते एंबुलेंस के लिए किसानों के तंबुओं के बीच से रास्ता खोल दिया गया है।

यह भी पढ़ें: Bharat Bandh: पंजाब में व्यापक असर, प्रदर्शनकारी किसानों ने रास्तों को किया जाम

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